ऐ काश!
फिर से तलाश करता मंजिल,
फिर से राहें ढूँढा करता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश! अगर मैं खो जाता...
ऐ काश! के मेरे हाथों से,
कुछ बनी लकीरें मिट जाती,
ऐ काश! के मेरे माथे की,
ये शिकन कहीं जा छिप जाती,
जो दफन हो गया है मुझमे,
वो राज़ उजागर हो जाता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
ऐ काश! वक़्त फिर से चुनाव का,
अवसर मुझको दे देता,
ऐ काश! वो सपने आँखों में,
मैं छीन के फिर से ले आता,
आज़ाद समंदर के रस्ते,
तालाब का पानी चल पड़ता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
फिर से तलाश करता मंजिल,
फिर से राहें ढूँढा करता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
- ऋषि चन्द्र
फिर से तलाश करता मंजिल,
फिर से राहें ढूँढा करता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश! अगर मैं खो जाता...
ऐ काश! के मेरे हाथों से,
कुछ बनी लकीरें मिट जाती,
ऐ काश! के मेरे माथे की,
ये शिकन कहीं जा छिप जाती,
जो दफन हो गया है मुझमे,
वो राज़ उजागर हो जाता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
ऐ काश! वक़्त फिर से चुनाव का,
अवसर मुझको दे देता,
ऐ काश! वो सपने आँखों में,
मैं छीन के फिर से ले आता,
आज़ाद समंदर के रस्ते,
तालाब का पानी चल पड़ता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
फिर से तलाश करता मंजिल,
फिर से राहें ढूँढा करता,
इक रोज़ कहीं चलते चलते,
ऐ काश अगर मैं खो जाता...
- ऋषि चन्द्र
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ReplyDeleteBahut dino baad bahut achchi kavitain padhin.... really amazing.... keep it up... GOD BLESS
thnku ji....n its so gud 2 see u here...welcm...who gav u d link?...i mst also thnk him/her...hehe...
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