पतली गली से
दुकानों में यूँ आग लगते रहे तो
लकरी कुतर के भी खाना पड़ेगा
पानी को वाटर न कह कह के बेचो
के नाली में गोता लगाना पड़ेगा
खुले चोंच कितने हैं दाने मगर दो
रिश्ता भी उसमे निभाना पड़ेगा
ठसमठस है चारों तरफ हाल भैया
के पतली गली से ही जाना पड़ेगा
कभी शौकिया भी जो बाज़ार निकले ,
खरे रोंगटों को सुलाना पड़ेगा ,
खातिर की ज्यादा तलब जो हुई तो ,
नंगे बदन मार खाना पड़ेगा ,
कल रात खम्भे से जोड़ा था टांका ,
फिर से किसी को चढ़ाना पड़ेगा ,
ठसमठस है चारों तरफ हाल भैया
के पतली गली से ही जाना पड़ेगा
अगर यार की याद आने लगेगी ,
तो बटुआ वो पहले छुपाने लगेगा ,
के लगता है अब भीख देने के बदले ,
भिखारी का डब्बा उड़ाना पड़ेगा ,
इंजन बिना तो चले ही थे पैदल ,
अब इंधन का खर्चा बचाना पड़ेगा
ठसमठस है चारों तरफ हाल भैया
के पतली गली से ही जाना पड़ेगा...
कर देंगे घटना कोई दिन दहाड़े,
गुज़ारे का मुमकिन बहाना मिलेगा
लगा हथकड़ी ले के जाएँ बड़े घर ,
तो फ़ोकट का खाना खज़ाना मिलेगा ,
कब तक युं ही नल की टप टप चलेगी,
बूंदों से कब तक नहाना पड़ेगा,
ठसमठस है चारों तरफ हाल भैया
के पतली गली से ही जाना पड़ेगा
लकीरों के बदले दरारें बनी हो ,
तो ज्योतिष को भी सिर झुकाना पड़ेगा,
कहे भी तो क्या चन्द्र, जब हाल ये है,
के ग़म भी हँसा के सुनाना पड़ेगा,
तुम्हे तो सुना ही दी अपनी कविता ,
अब नया कोई मुर्गा फ़साना पड़ेगा,
ठसमठस है चारों तरफ हाल भैया
के पतली गली से ही जाना पड़ेगा
- ऋषि चन्द्र