Saturday, March 15, 2014

ख़ूबसूरत है… 
 
 
बेताब आँखें ढूंढती तेरी ही सूरत है,
तू मेरी आशिकी से भी ज्यादा ख़ूबसूरत है… 
 
बंजर बने गुलशन, छू कर तू गुज़र जाये अगर,
मौत से हो इश्क़, के तेरे नाम पे आए अगर,
घायल को मरहम की नहीं तेरी ज़रूरत है,
तू मेरी आशिकी से भी ज्यादा ख़ूबसूरत है… 
 
पत्थर को भी दिल पे नहीं रहता कोई काबू,
के जिसको मुस्कुराकर देखने पर आते हैं आँसू ,
तू खुश्बू में लिपटी प्यार कि वो आखिरी ख़त है… 
तू मेरी आशिकी से भी ज्यादा ख़ूबसूरत है… 
 
न हूँ हमसाज, ना आशिक ही, ना दिलदार हूँ तेरा...
के हो कर दफ्न  मेरे रूह में असरार है मेरा..
मेरे बेसब्र दिल कि इक अकेली तू ही हसरत है… 
तू मेरी आशिकी से भी ज्यादा ख़ूबसूरत है…  
 
बेताब आँखें ढूंढती तेरी ही सूरत है,
तू मेरी आशिकी से भी ज्यादा ख़ूबसूरत है…
 
 
- ऋषि चन्द्र 

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