Thursday, September 6, 2012


 एक नाज़ुक सा रिश्ता जी रहा है

गुज़रते पलों में 
एक नाज़ुक सा रिश्ता जी रहा है 

खुद ही ख़ुशी बुनता 
दिल की कही सुनता 
खुल कर हवा साँसों से अपने पी रहा है
गुज़रते पलों में 
एक नाज़ुक सा रिश्ता जी रहा है

खुद को बचाने को 
सुन कर जमाने को 
हिम्मत भी करता और डरता भी रहा है 
गुज़रते पलों में 
एक नाज़ुक सा रिश्ता जी रहा है

अंजाम से अंजान 
देखो के ये नादान 
छिप कर कहीं लब  खुद ही अपने सी रहा है 
गुज़रते पलों में 
एक नाज़ुक सा रिश्ता जी रहा है 

1 comment:

  1. I wish ki ye meri kalam se likhi gayi hoti.... i dont know y these lines of yours brought tears in my eyes.... and that's the beauty of this creation.
    May GODDESS SARASWATI showers her blessings on U always.

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