न बयां राज़ होगा
तेरे कद्रदानों में होंगे फ़रिश्ते
मगर जानशीं ये न अंदाज़ होगा...
मोहब्बत के मारे तो हैं लाख लेकिन
रुसवा भी होकर मुझे नाज़ होगा ....
सराबोर होगा नशे में वो शबनम
न फिर साथ उसके ये अल्फाज़ होगा
रह जाएगी कैद उसकी अदाएं
न छलकेगा मय न बयां राज़ होगा ..
मगर जानशीं ये न अंदाज़ होगा...
मोहब्बत के मारे तो हैं लाख लेकिन
रुसवा भी होकर मुझे नाज़ होगा ....
सराबोर होगा नशे में वो शबनम
न फिर साथ उसके ये अल्फाज़ होगा
रह जाएगी कैद उसकी अदाएं
न छलकेगा मय न बयां राज़ होगा ..
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