भूल
भूल है तुझसे ये मेरी दिल्लगी ,
के दिल पे तेरे और कोई नाम है ,
फिर भी क़यामत तक चलेगा सिलसिला ...
बाँकी बचा क्या दिलजले को काम है ?
इज़हार कर कैसे मैं ग़म दे दूँ तुझे ,
न इश्क इतना भी बेगाना है मेरा ,
तुझको खबर ये उम्र भर होगी नहीं ,
के और भी कोई दिवाना था तेरा...
अक्सर तुम्हारी याद आएगी मुझे ,
अक्सर तुम्हे भी आएगी कुछ हिचकियाँ ,
यूहीं हँसी सजती रहेगी होंठ पर ,
चुपचाप ही खिंचती रहेगी सिसकियाँ...
लहरों में बहने के लिए तैयार हूँ ,
अब डूबने से दिल कहाँ अंजान है ,
घाव के दुखने में अब है क्या मज़ा ,
दर्द जब नासूर का बदनाम है ...
भूल है तुझसे ये मेरी दिल्लगी ,
के दिल पे तेरे और कोई नाम है ,
फिर भी क़यामत तक चलेगा सिलसिला...
बाँकी बचा क्या दिलजले को काम है ?
-ऋषि चन्द्र
kya baat... kya baat ... kya baat....
ReplyDeletehats off to U
thnku so mch...
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