आँधी
मैं कहीं चुपचाप सहमा सा खरा था,
तभी इक बदलाव की आँधी चली थी,
वक़्त के धागे फिसलते जा रहे थे ,
और ,लहराना बदन की बेबसी थी ...
धूल आँखों में लिए, सपने दफ़न कर ,
शामिल हुई इस होड़ में हर ज़िन्दगी थी,
अंजान राहों में मिले थे लोग ऐसे ,
के, दुश्मनों से ही, हमारी दोस्ती थी ...
फँस गए ऐसे थे अंधर में परिंदे ,
के लुट गयी पंखों की वो आवारगी थी ,
और मकसद भी बदलते जा रहे थे ,
रुख हवा जैसे बदलती जा रही थी ...
हाँ ,खो गया मेरा बहुत कुछ है मगर ,
कब , कहाँ, मेरी कोई मर्ज़ी चली थी ,
मैं कहीं चुपचाप सहमा सा खरा था ,
तभी इक बदलाव की आँधी चली थी...
तभी इक बदलाव की आँधी चली थी,
वक़्त के धागे फिसलते जा रहे थे ,
और ,लहराना बदन की बेबसी थी ...
धूल आँखों में लिए, सपने दफ़न कर ,
शामिल हुई इस होड़ में हर ज़िन्दगी थी,
अंजान राहों में मिले थे लोग ऐसे ,
के, दुश्मनों से ही, हमारी दोस्ती थी ...
फँस गए ऐसे थे अंधर में परिंदे ,
के लुट गयी पंखों की वो आवारगी थी ,
और मकसद भी बदलते जा रहे थे ,
रुख हवा जैसे बदलती जा रही थी ...
हाँ ,खो गया मेरा बहुत कुछ है मगर ,
कब , कहाँ, मेरी कोई मर्ज़ी चली थी ,
मैं कहीं चुपचाप सहमा सा खरा था ,
तभी इक बदलाव की आँधी चली थी...
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