Thursday, April 28, 2011

ढूँढ़ते रह जायेंगे

दूरियों से डर नहीं था कल तलक,
पर आज आँखों में न जाने क्यूँ नमी है,
भाव क्यूँ बदले हुए चेहरे पे सबके,
वक़्त के पहिये पे धड़कन क्यूँ थमी है।

भावनाओं में कभी बहते न थे,
और थम जाने की थी आदत नहीं,
ये आज हमपर कौन काबिज हो गया,
जो पार इक दहलीज भी होती नहीं।

कल यहाँ जब भी कभी हम आयेंगे,
पहचान हो अनजान सारे जायेंगे,
कुछ नए चेहरों में खुशियाँ जो मिलेगी,
बस वही अपनी झलक दिखलायेंगे।

कोई हमारे साथ हो या ना सही,
यादों के साए साथ ही रह जायेंगे,
जब भी पलट कर फिर पढेंगे जिंदगी,
जो खो गया है, ढूँढ़ते रह जायेंगे।

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