चलता जा
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
क्या हुआ जो सपना उजड़ गया,
क्या हुआ जो साथी बिछड़ गया,
बहते जाने को धारे पर,
बस एक ही तिनका काफी है...
सूरज में इतनी तपिश नहीं,
आंधी में ऐसा वेग नहीं,
अवरुद्ध कर सके राह तेरी,
इच्छा जबतक निश्पापी है...
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
परवाह न कर उस मंजिल की
जो पहुँच कहीं रुक जाती है,
वो है अनंत तक राह तेरी,
तू केवल उसका राही है...
झंकार नसों में बज उट्ठे,
जग निश्चय देख सिहर उट्ठे,
जब बुझता है तारा-तारा,
तब भोर स्वतः हो जाती है,
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
-ऋषि चन्द्र
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
क्या हुआ जो सपना उजड़ गया,
क्या हुआ जो साथी बिछड़ गया,
बहते जाने को धारे पर,
बस एक ही तिनका काफी है...
सूरज में इतनी तपिश नहीं,
आंधी में ऐसा वेग नहीं,
अवरुद्ध कर सके राह तेरी,
इच्छा जबतक निश्पापी है...
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
परवाह न कर उस मंजिल की
जो पहुँच कहीं रुक जाती है,
वो है अनंत तक राह तेरी,
तू केवल उसका राही है...
झंकार नसों में बज उट्ठे,
जग निश्चय देख सिहर उट्ठे,
जब बुझता है तारा-तारा,
तब भोर स्वतः हो जाती है,
पग-पग दो पग हैं साथ तेरे,
क्षण-क्षण हर क्षण अभिलाषी है,
चलता जा मन तू क्या जाने,
क्या क्या तय होना बाँकी है...
-ऋषि चन्द्र
आप वाकई बहुत खूबसूरत लिखते हैं/ मै आशा करती हूँ आने वाले समय में भगवान् आपको इस कला से और नवाज़े/
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