Tuesday, December 27, 2011

कल रात ...

चाँदनी उस बात से अंजान थी
जुगनू भी उस हालात से थे बेखबर
के दूर चिलमन पे कोई शम्मा जली
कल रात भर ठहरी रही जिसपे नज़र ...

उन श्वेत किरणों ने दिए को जब छुवा
उठने लगी चिंगारियों की इक लहर
उस लौ से होके थी गुज़रती जो हवा
कहती थी अब तूफ़ान लायेंगे इधर ...

जो चाँद को देखा किये आकाश में
समझेंगे आखिर क्या मेरा हाल - -जिगर
जो रूप आँखों में उतर आया मेरे
दीवानगी सा कर रहा मुझपे असर ...

कुछ पल को थी जिन्दा हुई ये ज़िन्दगी
इक राह पर जब था मिला वो हमसफ़र
के दूर चिलमन पर कोई शम्मा जली
कल रात भर ठहरी रही जिसपे नज़र ...


-ऋषि चन्द्र

No comments:

Post a Comment